हर्षिल वैली. Harsil valley uttarakhand

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हेलो दोस्तों स्वागत है आपका देवभूमि उत्तराखंड के आज के नए लेख में। आप लोगों को बताने वाले हैं उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित हर्षिल वैली के बारे में जो की प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण एक ऐसी वैली है जिसके दर्शन करना हर एक प्रकृति प्रेमी का सपना होता है। इसलिए के माध्यम से हम आपको हर्षिल वैली ( harsil uttarakhand ) के बारे में संपूर्ण जानकारी जैसे की हर्षिल वैली जाने का समय एवं हर्षिल वैली कैसे पहुंचे के बारे में भी जानकारी देने वाले हैं। दोस्तों आशा करते हैं कि आपको हमारा यह लेख पसंद आएगा इसलिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ना ।

हर्षिल वैली. Harsil Valley Uttarakhand

उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में हर्षिल वैली ( Harsil Valley Uttarakhand) प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण एक ऐसी जगह हैं जहां की यात्रा हर कोई पर्यटक करना चाहते हैं। यात्रा करना हर एक प्रकृति प्रेमी का सपना होता है। भागीरथी नदी के किनारे पर स्थित घने दिन भर के जंगलों के बीचो-बीच एक छोटा सा हिल स्टेशन है जिसकी ऊंचाई लगभग समुद्र तल से 2660 मीटर है।

हर्षिल वैली प्राकृतिक सुंदरता यहां आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है छोटे-छोटे घास एवं खूबसूरत से बर्फीले पहाड़ की यात्रा को चार चांद लगाने वाले हैं। इसी के साथ में बहने वाले खूबसूरत से झरने यहां की यात्रा करने वालों के मन को तरोवताज कर देते हैं। हर्षिल वैली बर्ड वॉचिंग और ट्रेकिंग के साथ साथ कई प्रकार की गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है।

Harsil valley uttarakhand (1)

हर्षिल वैली की खोज. Harsil Valley Ki Khoj

दोस्तो हर्षिल वैली की खोज किसने की इस बात के ऊपर चर्चा करने से पहले हम आपको बताना चाहेंगे कि कहते हैं कि इस जगह में भगवान विष्णु ने हरी का रूप धारण किया था और भागीरथी वह जलधारी नदी के तेज प्रभाव को रोकने के लिए भगवान विष्णु ने यहां पर एक पत्थर की शीला का रूप लिया था। शुरुवाती समय इस जगह का नाम हरिशीला था।

1857 में एक अंग्रेज अफसर फ्रेडरिक विल्सन ने इस जगह का नाम हर्षिल वैली रखा। तब से यह जगह हर्षिल वैली के नाम से जानी जाती है। फ्रेडरिक विल्सन इंडिया कंपनी को छोड़ने के बाद उत्तराखंड की यात्रा पर निकले और उन्होंने भागीरथी नदी के किनारे पर इस खूबसूरत सी घाटी को देखा जहां पर उन्हें उसे समय देवदार के खूबसूरत से पेड़ और विभिन्न प्रकार के फूल देखने को मिले। फ्रेडरिक विल्सन पर अपना जीवन बिताने लगे और प्रकृति की छांव में उन्होंने सेब के पेड़ भी लगाए जो कि आज के समय में विल्सन प्रजाति के सेब के लिए पहचाने जाते है।

सन 1985 में फिल्मी अभिनेता राज कपूर को भी यह जगह काफी पसंद आएगी और उन्होंने राम तेरी गंगा मैली फिल्म के अधिकांश हास्य की शूटिंग हर्षिल वैली में ही की ।

आप भी इस खूबसूरत सी जगह के दर्शन करना चाहते हैं तो दोस्तों हम आपको बताना चाहेंगे कि आप किस तरीके से यहां तक पहुंच सकते हैं और हर्षिल वैली में यात्रा का सबसे अच्छा समय कौन सा माना जाता है।

हर्षिल वैली यात्रा का अच्छा समय. Harsil Valley Ghumne Ka Samay

दोस्तों यदि आप हर्षिल वैली के दर्शन करना चाहते हैं और घूमने का सबसे अच्छा समय के बारे में जानना चाहते हैं तो हम आपको बताना चाहेंगे कि हर्षिल वैली की यात्रा का सबसे अच्छा समय अगस्त से सितंबर माह के बीच माना जाता है। क्योंकि इस बीच बरसात का मौसम होता है और चारों तरफ झील जनों से पानी बहता रहता है इसके अलावा हरी-भरी घास के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की खूबसूरत से फूल हर्षिल वैली में खिले हुए होते हैं।

Harsil valley uttarakhand (2)

हर्षिल वैली कैसे पहुंचे. Harsil Valley Kese Pachuchen

दोस्तों यदि आप भी हर्षिल वैली दर्शन करना चाहते हैं तो आपको बताना चाहेंगे कि हर्षिल वैली पहुंचे ( Harsil Valley Uttarakhand) के लिए आप सड़क मार्ग और रेल मार्ग के अलावा वायु मार्ग का उपयोग कर सकते हैं।

सड़क मार्ग से हर्षिल वैली – हर्षिल वैली सड़क मार्ग से लगभग ऊंची दूरी पर स्थित है आप लोग ऋषिकेश से 200 किलोमीटर की यात्रा करके उत्तरकाशी तक पहुंच सकते हैं। और उत्तरकाशी 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग द्वारा हर्षिल वैली – ऋषिकेश हरिद्वार और देहरादून इन तीनों जगह में रेलवे स्टेशन उपलब्ध है जहां से हर्षिल वैली के दर्शन कर सकते हैं।

वायु मार्ग द्वारा हर्षिल वैली – हर्षिल वैली का निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है जहां से हर्षिल वैली की दूरी 200 किलोमीटर है। यहां से आप बस और टैक्सी के माध्यम से भी उत्तरकाशी तक पहुंच सकते हैं।

दोस्तों यह था हमारा आज का लेख जिसमें हमने आपको हर्षिल वैली के बारे में ( Harsil Valley Uttarakhand) जानकारी दी। आशा करते हैं कि आपको हर्षिल वैली के बारे में जानकारी मिल गई होगी। आपको यह लेख कैसा लगा हमें टिप्पणी के माध्यम से जरूर बताएं। उत्तराखंड से संबंधित ऐसे ही जानकारी युक्त लेख पाने के लिए आप देवभूमि उत्तराखंड को जरूर फॉलो करें।

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