तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड. Tungnath Temple Uttarakhand

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नमस्ते दोस्तों स्वागत है आपका देव भूमि उत्तराखंड के आज के नए लेख में। आज के इस लेख के माध्यम से हम आप लोगों के साथ उत्तराखंड का पवित्र धाम तुंगनाथ मंदिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं। देवभूमि उत्तराखंड में भगवान भोलेनाथ की कई ऐसी पवित्र धाम है जो कि अपनी इतिहास और पौराणिक मान्यताओं को अपने में समेटे हुए हैं। उन्हीं स्थानों में से एक है तुंगनाथ मंदिर जोकि अपने भव्य इतिहास और मान्यताओं के अलावा यहां के प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी पहचाना जाता है। आज के इस लेख में हम आपको तुंगनाथ मंदिर के बारे में संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं आशा करते हैं कि दोस्तों आपको हमारे यह लेख पसंद आएगा इसलिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ना।

तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड. Tungnath Temple Uttarakhand

भगवान शिव जी को समर्पित तुंगनाथ मंदिर भारत के उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है । हिमालय की खूबसूरत प्राकृतिक वादियों के बीच में स्थिति भगवान भोलेनाथ का यह पावन धाम मंदिर 5000 वर्ष पुराना माना जाता है। तुंगनाथ मंदिर समुद्र तल से लगभग 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

यहां भगवान शिव जी के पंच केदार रूप में से एक की पूजा की जाती है। ऐतिहासिक मान्यता है कि तुंगनाथ मंदिर भगवान शिव जी के सबसे ऊंचाई पर स्थित मंदिरों में से एक है। जिसका निर्माण ग्रेनाइट पत्थरों से भव्य एवं आकर्षक तरीके से किया गया है। इसके आसपास का सुंदर सा वातावरण और हिमालय के शानदार दृश्य प्रस्तुत करते यहां के खूबसूरत से पर्वत शरद ऋतु में बर्फ की चादर ओढ़े दिखाई देते हैं। शायद यही कारण है कि पूरे वर्ष भर में यहां पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आया करते हैं।

तुंगनाथ महादेव मंदिर की स्थापना. Tungnath Mandir Isthapna

पौराणिक कहानियों के आधार पर तुंगनाथ महादेव मंदिर की स्थापना आज से करीब 1000 वर्षों से भी पहले का माना जाता है। किवदंती है कि तुंगनाथ मंदिर का निर्माण पांडवों ने कुरुक्षेत्र के युद्ध में अपने संबंधियों के नरसंहार के पाप से बचने के लिए करवाया था। मान्यता है कि जब कुरुक्षेत्र में पांडवों की लड़ाई हुई थी तो उनके सगे संबंधी भी उनके द्वारा मारे गए थे जिसके कारण भगवान शिव जी उनसे नाराज हो गए थे और भगवान शिव जी को मनाने के लिए उन्होंने तुंगनाथ मंदिर की स्थापना की थी।

Tungnath Mandir Isthapna

तुंगनाथ मंदिर की पौराणिक मान्यताएं. Tungnath Mandir Manyta

प्यारे पाठको तुंगनाथ मंदिर की पौराणिक मान्यताओं के बारे में किवदंती है कि यहां पर भगवान भोलेनाथ के हृदय और उनकी भुजाओं की पूजा होती है। मंदिर में पूजा कार्य का दायित्व स्थानीय लोगों का होता है। जबकि चार धाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं द्वारा इस मंदिर के दर्शन बड़े आराम से किए जा सकते हैं।

तुंगनाथ मंदिर के कपाट मई के महीने में खुलते हैं और लगभग सर्दियों में यानी कि नवंबर माह में दीपावली के समय बंद कर दिए जाते हैं। इस बीच यहां पर काफी बर्फ पड़ती है इसलिए श्रद्धालुओं की सुविधाओं को देखते हुए मंदिर के कपाट मई के महीने में खोले जाते हैं।

तुंगनाथ महादेव मंदिर का इतिहास लगभग 1000 वर्षों से पुराना है। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण होने के कारण तुंगनाथ को भारत का मिनी स्विट्ज़रलैंड भी कहा जाता है। इसके निकटवर्ती दार्शनिक स्थल में चोपता है जहां से मंदिर की दूरी मात्र 3.30 किलोमीटर है ।

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तुंगनाथ मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय. Tungnath Mandir Jane Ka Samay

प्यारे पाठको जैसा कि हम आपको पहले भी बता चुके हैं कि तुम नाथ मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय मई से लेकर अक्टूबर माह तक होता है। क्योंकि इसके बाद यहां प अधिक बर्फ एवं ठंड होने के कारण मौसम ठंडा रहता है श्रद्धालुओं के आवागमन में परेशानियां देखने को मिलती है।

इसलिए तुंगनाथ मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय मई माह से अक्टूबर माह के बीच माना जाता है। इस बीच यहां का मौसम अच्छे बने रहने के साथ-साथ गर्मी के मौसम से भी निजात दिलाता है।

तुंगनाथ मंदिर कैसे जाएं. Tungnath Mandir Kese Jayen

दोस्तों तुंगनाथ मंदिर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग के साथ-साथ वायु मार्ग एवं रेल मार्ग का विकल्प भी शामिल है। सड़क मार्ग के माध्यम से रघुनाथ मंदिर आराम से पहुंचा जा सकता है। सर्वप्रथम श्रद्धालु चोपता पहुंचते हैं जिसके बाद वह मंदिर परिसर तक आराम से पहुंच सकते हैं।

रेल मार्ग के माध्यम से चोपता पहुंचना काफी आसान है। तुंगनाथ मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और काठगोदाम है जोकि चोपता से लगभग 207 किलोमीटर एवं 276 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

Kaalimath Mandir Ka Itihas

हवाई जहाज के द्वारा तुंगनाथ मंदिर पहुंचने के लिए निकटतम एयरपोर्ट जौली ग्रांट है। यहां से चोपता की दूरी करीब 224 किलोमीटर है। आप अपने नजदीक एयरपोर्ट से जौलीग्रांट तक पहुंच सकते हैं और यहां से प्राइवेट टैक्सी एवं बस के माध्यम से भी तुंगनाथ मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

दोस्तों यह तो हमारा आजकल एक जिसमें हमने आपको तुंगनाथ मंदिर के बारे में जानकारी दी। दोस्तों ऐसा कहते हैं कि आपको तुंगनाथ मंदिर के बारे में जानकारी प्राप्त हो गई होगी । यदि आपको हमारा यह लेख पसंद आया है तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर साझा करें।

तुंगनाथ महादेव मंदिर F&Q

Q – तुंगनाथ की ऊंचाई

Ans – भगवान शिव जी को समर्पित तुंगनाथ मंदिर समुद्र तल से लगभग 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां भगवान शिव जी के पंच केदार रूप में से एक की पूजा की जाती है।

Q – तुंगनाथ मंदिर कहां स्थित है।

Ans – तुंगनाथ मंदिर भारत के पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में स्थित चोपता से लगभग 71 किलोमीटर की दूरी पर बना हुआ एक भव्य मंदिर है। जो कि पूरे वर्ष भर में लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

Q – चोपता से तुंगनाथ की दूरी

Ans – चोपता से तुंगनाथ मंदिर की दूरी लगभग 71 किलोमीटर है। यहां से सभी श्रद्धालु सड़क मार्ग के माध्यम से बस एवं प्राइवेट टैक्सी के द्वारा भी तुंगनाथ मंदिर तक पहुंच सकते हैं। चार धाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के द्वारा तुंगनाथ मंदिर के दर्शन किए जाते हैं

Q – ऋषिकेश से तुंगनाथ की दूरी

Ans – ऋषिकेश से तुंगनाथ मंदिर की दूरी 206 किलोमीटर है। ऋषिकेश तुंगनाथ मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन है। यहां से प्राइवेट टैक्सी एवं बस के माध्यम से अभी तक नाथ मंदिर पहुंचा जा सकता है। आमतौर पर श्रद्धालु चोपता होते हुए तुंगनाथ मंदिर के दर्शन करते हैं।

Q – रुद्रप्रयाग से तुंगनाथ की दूरी

Ans – रुद्रप्रयाग से तुंगनाथ मंदिर की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है। यहां से प्राइवेट टैक्सी और बस के माध्यम से भी श्रद्धालु तुंगनाथ मंदिर तक पहुंच सकते हैं। ऐतिहासिक मान्यता है कि तुंगनाथ मंदिर भगवान शिव जी के सबसे ऊंचाई पर स्थित मंदिरों में से एक है।

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