बिच्छू घास के बारे में. Bicchu Ghas Ke Baren Main

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नमस्ते दोस्तों स्वागत है आपका देव भूमि उत्तराखंड के आज के नए लेख में. आज हम आप लोगों को बिच्छू घास के बारे में जानकारी देने वाले हैं। इस लेख में हम जाने वाले हैं कि बिच्छू घास क्या है एवं बिच्छू घास के औषधीय गुण कौन-कौन से हैं। तो चलिए आज का लेख शुरू करते हैं।

बिच्छू घास के बारे में. Bicchu Ghas Ke Baren Main

उत्तराखंड एवं अन्य पर्वतीय इलाकों में पाए जाने वाला बिच्छू घास वर्ष भर में हरा भरा लगने वाला एक औषधीय पौधा है जोकि उत्तराखंड में बहुतायत मात्रा में पाया जाता है। उत्तराखंड के कुछ भागों में इसे सियून नाम से जाना जाता है जबकि अन्य भागों में ऐसे कंडेली के नाम से भी जाना जाता है।

दिखने में यह पौधा हरा भरा होने के साथ-साथ इसके पत्तों एवं पूरे पेड़ पर छोटे से निकली धार कांटे होते हैं। जिन्हें छूने पर करंट का एहसास होता है। सामान्यतः बिच्छू घास का उपयोग आयुर्वेद में औषधि के रूप में किया जाता है। जबकि स्थानीय लोगों द्वारा इसे सब्जी बनाने के साथ-साथ अपने गाय एवं भैंस के लिए चारे के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसमें विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं जो कि गाय एवं भैंस के दूध बढ़ाने में सहायता करते हैं।

बिच्छू घास को कैसे पहचाने. Bicchu Ghas Ko Kese Pahchane

दिखने में यहां एक झाड़ी की तरह होती हैं जो कि पूरे वर्ष भर में हरी-भरी रहती है। इसके पत्तों पर छोटे-छोटे नुकीले दार कांटे होते हैं जिन्हें स्पर्श करने करंट जैसा प्रतीत होता है। आमतौर पर यह पौधा दो से 4 फीट ऊंचा होता है। उत्तराखंड के कुछ भागों में इसकी झाड़ियां भी पाई जाती है जबकि अन्य भागों में देखा जाए तो यह लगभग 4 फीट ऊंचा एक पौधा होता है।

बिच्छू घास का वैज्ञानिक नाम आर्टिका डाईओका (urtica dioica) हैं। आयुर्वेद में यह पौधा विभिन्न प्रकार के उपचारों के लिए औषधि का कार्य करता है। यह पौधा गर्म होता है इसलिए बिच्छू घास की तासीर गर्म होती है आमतौर पर सर्दियों के समय में इसका सब्जी के रूप में उपयोग किया जाता है। गर्मियों के समय में कंडेली की भुज्जी का सेवन करने से बचना चाहियें। क्योकि यह काफी गर्म होती है।

बिच्छू घास के औषधीय गुण. Bicchu Ghas Ke Aoushdiya Gun

उत्तराखंड एवं हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाला यह औषधीय पौधा आयुर्वेद में औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। प्राकृतिक रूप से उत्पन्न यह पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होता है जिसमें तमाम प्रकार के विटामिन एवं आयरन ,कैल्शियम और मैग्नीशियम मात्रा प्रचुर होती है। इन सभी गुणों के कारण इन्हें आयुर्वेद में भी उपयोग किया जाता है।

बिच्छू घास का औषधि के रूप में उपयोग बुखार आने के बाद शरीर में मौजूद कमजोरी को दूर करने के लिए भी बिच्छू घास का सेवन लाभकारी माना जाता है। पित्र दोष एवं गठिया जैसे शरीर के रोगों में यहां औषधि उपचार का कार्य करती है। बिच्छू घास के साथ अन्य औषधीय जड़ी बूटियों को मिलाकर औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है।

बिच्छू घास के उपयोग. Bicchu Ghas Ke Upyog

बिच्छू घास एक आयुर्वेदिक पौधा होने के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्र का एक बारहमासी पौधा है जो कि हर समय उपलब्ध रहता है। बिच्छू ऐसी खासियत है कि यह हमेशा हरा भरा देखने के साथ-साथ ताजा दिखाई देता है। आयुर्वेद के अलावा बिच्छू घास को अन्य कई जगह में उपयोग किया जाता है।

  • बिच्छू घास का उपयोग हर्बल टी बनाने में किया जाता है। उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों में इसके हर्बल टी सेंटर बनाए गए हैं।
  • दुधारू पशुओं के चारे की पूर्ति के लिए भी बिच्छू घास का उपयोग उपयुक्त माना जाता है।
  • बिच्छू घास का उपयोग पौष्टिक तत्वों से भरपूर स्वादिष्ट सब्जी यानी कि कंडाली की भुजी बनाने के लिए भी उपयोग किया जाता है।
  • बिच्छू घास का उपयोग आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार की औषधि बनाने में किया जाता है।
  • कंडेली की भुज्जी और मंडवे की रोटी उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध व्यंजनों में से एक है। इसके सेवन से कई फायदे होते है।

Q – बिच्छू घास scientific name

Ans – बिच्छू घास का वैज्ञानिक नाम आर्टिका डाईओका (urtica dioica) हैं। आयुर्वेद में यह पौधा विभिन्न प्रकार के उपचारों के लिए औषधि का कार्य करता है।

Q – बिच्छू घास in English

Ans – बिच्छू को अंग्रेजी में scorpion grass के नाम से जाना जाती है। दिखने में यह पौधा हरा भरा होने के साथ-साथ इसके पत्तों एवं पूरे पेड़ पर छोटे से निकली धार कांटे होते हैं। जिन्हें छूने पर करंट का एहसास होता है।

Q – बिच्छू घास का फल

Ans – बिच्छू घास का औषधि के रूप में उपयोग बुखार आने के बाद शरीर में मौजूद कमजोरी को दूर करने के लिए भी बिच्छू घास का सेवन लाभकारी माना जाता है। पित्र दोष एवं गठिया जैसे शरीर के रोगों में यहां औषधि उपचार का कार्य करती है।

Q – बिच्छू घास की चाय

बिच्छू घास का उपयोग हर्बल टी बनाने में किया जाता है। उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों में इसके हर्बल टी सेंटर बनाए गए हैं। दुधारू पशुओं के चारे की पूर्ति के लिए भी बिच्छू घास का उपयोग उपयुक्त माना जाता है।

Q – बिच्छू घास का मधुमेह में उपयोग

Ans – बिच्छू घास उपयोग करने से मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। शरीर में ग्लाइसेमिक इंडेक्स उपवास के दौरान और भोजन के बाद बिच्छू बूटी की चाय का सेवन करने से नियंत्रित किया जा सकता है। मधुमेह में बिच्छू घास का उपयोग लाभकारी हो सकता है।

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