गोपीनाथ मंदिर उत्तराखंड. Gopinath Mandir Uttarakhand

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हेलो दोस्तों स्वागत है आपका देवभूमि उत्तराखंड के आज के नए लेख में। आज के इसलिए के माध्यम से हम आप लोगों के साथ गोपीनाथ मंदिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं। मुझे लोग जानते हैं कि देवभूमि उत्तराखंड प्राचीन काल से ही अपनी ऐतिहासिक महत्व को संजोया हुआ है उन्हें धार्मिक स्थलों में से एक है गोपीनाथ मंदिर जो की उत्तराखंड के प्राचीन मंदिरों ( Gopinath Mandir Uttarakhand ) में से एक है। एक में हम आपको गोपीनाथ मंदिर के बारे में एवं गोपीनाथ मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के बारे में जानकारी देने वाले हैं। आशा करते हैं कि आपको हमारा यह लेख पसंद आएगा इसलिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ना।

गोपीनाथ मंदिर उत्तराखंड. Gopinath Mandir Uttarakhand

दोस्तों जैसा कि हम आपको पहले भी बता चुके हैं कि देवभूमि उत्तराखंड प्राचीन काल से ही दिव्य आत्माओं का निवास स्थान रही है। चाहे यहां के धार्मिक स्थल हो या तीर्थ स्थल हो या पर्यटन स्थल हर जगह देवी देवताओं का वास माना जाता है। अपनी जगह में से एक है गोपीनाथ मंदिर जो कि उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। दरअसल यह मंदिर गोपेश्वर नगर में स्थित एक पौराणिक शिव मंदिर है शायद इसी नगर के कारण इसे गोपीनाथ मंदिर कहां जाता है।

गोपेश्वर नगर के बीचो बीच में स्थित गोपीनाथ मंदिर अपनी भव्य वास्तु कला के लिए पहचाना जाता है। दरअसल पंच केदार में से एक रुद्रनाथ मंदिर के कपाट बंद होने पर चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ की चल विग्रह डोली को गोपीनाथ मंदिर में स्थापित किया जाता है। सर्दियों के समय में इस मंदिर में भगवान गोपीनाथ के साथ-साथ बाबा रुद्रनाथ की भी पूजा की जाती है।

आमतौर पर चार धाम यात्रा आते समय यात्री बद्रीनाथ की यात्रा के दौरान इस प्रसिद्ध गोपीनाथ मंदिर के भी दर्शन करते हैं। इस मंदिर की मुख्य खासियत यह है कि यह दर्शनार्थियों के लिए पूरे वर्ष भर खुला रहता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि जो भी भक्त यहां पर सच्चे मन से कामना करते हैं भगवान भोलेनाथ उनकी मनोकामना जरुर पूर्ण करते हैं।

गोपीनाथ मंदिर का इतिहास. Gopinath Mandir Itihas

गोपीनाथ मंदिर का इतिहास अपने आप में प्राचीन है। जैसा कि हम आपको पहले भी बता चुके हैं कि गोपीनाथ मंदिर उत्तराखंड के गोपेश्वर नामक शहर में स्थित है। शहर के नाम से ही इस मंदिर का नाम शायद गोपीनाथ मंदिर रखा गया। मंदिर के निर्माण विषय में मान्यता है कि मंदिर का निर्माण नौवीं और 11वीं शताब्दी के बीच कत्यूरी शासको के माध्यम से किया गया। मंदिर का निर्माण में हिमाद्रि शैली का उपयोग बेखुदी से देखने को मिलता है।

ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार यह भी जानकारी मिलती है की नेपाल के राजाओं द्वारा 13वीं शताब्दी में यहां शान हुआ करता था। इसकी पुष्टि के लिए उनका अभिलेख देवनागरी लिपि में लिखा हुआ है जो कि आज भी मंदिर में स्थित है। मंदिर के आंगन में मौजूद बहुत सारी टूटी मूर्तियां स्थापित है जो की मंदिर के अस्तित्व को बनाई हुई है।

गोपीनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता. Gopinath Mandir Manyta

किसी भी धार्मिक स्थल की अपने आप में खास महत्व होता है ठीक उसी तरह से गोपीनाथ मंदिर से जोड़ी पौराणिक मान्यता यहां पर जो भी भक्त सच्चे मन से कामना करते हैं भगवान भोलेनाथ जी उनकी मनोकामना जरुर पूर्ण करते हैं। कोई भी भक्त से खाली हाथ नहीं जाता है। गोपीनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर वैतरणी नाम का एक कुंड स्थित है इस कुंड के बारे में किवदंती है की आने पर समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती हैं।

दूसरी ओर मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता यह भी है कि शीतकाल में रुद्रनाथ मंदिर में स्थित भगवान भोलेनाथ की डोली को गोपीनाथ मंदिर में विराजमान किया जाता है और पूरे सर्दियों में भगवान भोलेनाथ के दर्शन इसी मंदिर में किए जाते हैं।

गोपीनाथ मंदिर की पौराणिक कथा. Gopinath Mandir Poranik Katha

दोस्तों गोपीनाथ मंदिर की पौराणिक कथा के बारे में बहुत कुछ पुरानी कथाओं से जानकारी मिलती है कि यह मंदिर भगवान शिव जी की तपस्या स्थली हुआ करती थी। भगवान शिव जी ने अनेकों वर्ष तक यहां पर तपस्या की थी और जब कामदेव ने तपस्या में व्यवधान डाला तो उन्होंने कामदेव को इसी स्थान पर भस्म किया था।

दूसरी कथा के अनुसार यह भी जानने को मिलता है की देवी सती के शरीर त्यागने के बाद दिमाग में ताड़कासुर नामक राक्षस का वध भी इसी स्थान पर किया था।

गोपीनाथ मंदिर कैसे पहुंचे. Gopinath Mandir kese Pahuchen

दोस्तों यदि आप भी गोपीनाथ मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं आपको बताना चाहेंगे कि गोपीनाथ मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वर शहर में स्थित है। जो की बद्रीनाथ यात्रा के मुख्य मार्ग पर पड़ता है। सड़क मार्ग के माध्यम से गोपीनाथ मंदिर आराम से पहुंचा जा सकता है चमोली से महेश 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गोपी नाथ मंदिर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे अच्छा विकल्प है। गोपीनाथ मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है एवं मंदिर का नजदीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। यहां से बस और टैक्सी के माध्यम से आराम से मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं।

प्यार पाठकों यह था हमारा आज का लेख जिसमें हमने आपको गोपीनाथ मंदिर के बारे में ( Gopinath Mandir Uttarakhand ) जानकारी दी। है कि आपको गोपीनाथ मंदिर के बारे में जानकारी मिल गई होगी आपको यह ले कैसा लगा हमें टिप्पणी के माध्यम से बताएं। यदि आपको यह लेख पसंद आया है तो और परिवार के साथ जरूर साझा करें।

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