कटारमल सूर्या मन्दिर अल्मोड़ा. Katarmal Sun Temple Almora

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हेलो दोस्तों स्वागत है आपका देवभूमि उत्तराखंड के आज के नए लेख में। आज के इस लेकर माध्यम से हम आप लोगों के साथ उत्तराखंड का प्रसिद्ध कटारमल सूर्या मन्दिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं। तो जैसे कि हमसे भी लोग जानते हैं कि उत्तराखंड में अनेकों ऐसे प्राचीन स्मारक है। जो अपने विशिष्ट वास्तुकला शैली के लिए पहचाने जाते हैं। आज के इस लेख में है हम आपको कटारमल सूर्य मंदिर अल्मोड़ा के बारे में जानकारी देने वाले हैं। आशा करते हैं कि आपको हमारा यह लेख पसन्द आयेगा।

कटारमल सूर्या मन्दिर अल्मोड़ा. Katarmal Sun Temple Almora

अल्मोड़ा से मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर कटारमल सूर्य मंदिर ( Katarmal Sun Temple Almora ) अधोली सुनार गांव में स्थित है जो की समुद्र तल से 2116 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है। कटारमल सूर्या मन्दिर अल्मोड़ा बारे में किवदंति है की कटारमल का सूर्य मंदिर कुमाऊं के सबसे विशाल एवं उत्तराखंड के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। जाता है कि कोणार्क सूर्य मंदिर के बाद सबसे प्राचीन मंदिर यही है जो लगभग 200 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है।

अल्मोड़ा के कटारमल नामक स्थान पर स्थित यह विशाल मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह उत्तराखंड के सबसे प्राचीन एवं विशाल मंदिर में से एक है जिसकी देखरेख का कार्य भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित रखा गया है। ऐतिहासिक भगवान सूर्य देव को समर्पित है जिनके पूरे भारत में कई सूर्य मंदिर है।

कटारमल सूर्य मंदिर का निर्माण. Construction of Katarmal Sun Temple

दोस्तों कटारमल सूर्य मंदिर के निमार्ण विषय के बारे में कहां जाता है कि कटारमल सूर्य मंदिर का निर्माण कस्तूरी वंशज के शासनकाल में हुआ था। राजा कटारमल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर में भगवान आदित्य की मूर्ति किसी पत्थर अथवा धातु की नहीं बल्कि पेड़ की लकड़ी से तैयार की गई है।
यदि बात की जाए मंदिर के गर्भ गृह के प्रवेश द्वार की तो वह भी लकड़ी से से ही उत्कीर्ण होकर तैयार की गई है। मुख्य मंदिर की सरंचना त्रिरथ है। जोकि वर्गाकार गर्भ ग्रह के साथ नगर शैली में निर्मित किया गया है।

कटारमल सूर्य मंदिर अल्मोड़ा का इतिहास. History of Katarmal Sun Temple Almora

कटारमल सूर्या मन्दिर इतिहास के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर अपनी विशेष वास्तुकला के लिए पहचाना जाता है। यहां छोटे-छोटे 45 मंदिरों का समूह है इसके बारे में इतिहासकारों का मानना है कि मंदिर का निर्माण अलग-अलग समय में हुआ था। लेकिन फिर भी अनुमान के अनुसार कटारमल सूर्या मन्दिर के निर्माण की अनुमानित समय 13वीं शताब्दी के आसपास माना जाता है।

इस सूर्य मंदिर की दीवार पर तीन लाइन लिखा एक विशाल शिलालेख है जिससे इतिहासकार अनुमान लगाते हैं कि इस मंदिर की मूर्तियों का निर्माण कस्तूरी राजवंश के समय में किया गया था। प्रसिद्ध कटारमल सूर्य मंदिर अल्मोड़ा में भगवान सूर्य देव की दो मूर्तियां स्थापित है। के अलावा मंदिर में भगवान विष्णु और शिव जी एवं भगवान गणेश जी भी विद्यमान है।

Katarmal Sun Temple Almora (1)

कटारमल के मंदिर की विशेषताएं. Features of the temple of Katarmal

प्यारे पाठको कटारमल सूर्या मन्दिर अल्मोड़ा के बारे में कहा जाता है कि भगवान सूर्य देव की धातु या पत्थर से निर्मित मूर्ति नहीं है बल्कि मूर्ति का निर्माण पेड़ की लकड़ी के माध्यम से किया गया है।

इस मंदिर में भगवान सूर्य देव की मूर्ति पद्मासन में स्थित है। भारत में कटारमल की अनेकों मंदिर है। लेकिन अल्मोड़ा में स्थित ऐतिहासिक मंदिर को सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है।

कटारमल सूर्य मंदिर अल्मोड़ा की कहानी. Story of Katarmal Sun Temple Almora

कटारमल सूर्य मंदिर अल्मोड़ा की कहानी के बारे में कहां जाता है कि देवभूमि उत्तराखंड प्राचीन समय से ही ऋषि मुनियों की भूमि रही है। एक बार द्रोणागिरी, कक्ष्य पर्वत पर ऋषि मुनि अपना जप तप कर रहे थे। तभी अचानक से एक असुर उन्हें परेशान करने लगा। जिससे परेशान होकर ऋषियों ने वहां से भागना शुरू कर दिया और कौशिकी नदी के तट पर शरण दी। वहा पर उन्होने भगवान सूर्य देव की आराधना की । उनकी आराधना को देखकर भगवान सूर्य देव प्रसन्न हुएं और सामने प्रकट हुए। जैसे ही वटशीला स्थापित हुई इस समय असुरपुरा परास्त हो गाएं। तब जाकर ऋषि मुनियों ने अपने जप तप का कार्य निर्भिद होकर शुरु किया।

कटारमल सूर्य मंदिर अल्मोड़ा कैसे जाएं. How to reach Katarmal Sun Temple Almora

यदि आप भी कटारमल सूर्य मंदिर अल्मोड़ा के दर्शन करना चाहते हैं तो बताना चाहेंगे कि कटारमल सूर्य मंदिर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग और वायु मार्ग के अलावा रेल मार्ग का विकल्प भी उपलब्ध है।

सड़क मार्ग से कटारमल सूर्य मंदिर – उत्तराखंड में स्थित कटारमल सूर्य मंदिर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। अल्मोड़ा से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कटारमल मंदिर पहुंचने के लिए आप रानीखेत के रास्ते भी प्रवेश कर सकते हैं।

ट्रेन से कटारमल सूर्य मंदिर कैसे जाएं – कटारमल सूर्य मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। दिल्ली से रानीखेत एक्सप्रेस सीधी ट्रेन है जो काठगोदाम तक आती है। काठगोदाम से आप बस एवं टैक्सी के माध्यम से भी कटारमल सूर्य मंदिर पहुंच सकते हैं।

हवाई जहाज से कटारमल सूर्य मंदिर अल्मोड़ा – दोस्तों कटारमल सूर्य मंदिर अल्मोड़ा नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर हवाई अड्डा है। यहां से अल्मोड़ा की दूरी मात्र 127 किलोमीटर है। पंतनगर हवाई अड्डा से अल्मोड़ा के लिए बस एवं टैक्सियां लगी रहती है। पर्यटक आराम से अल्मोड़ा तक पहुंचते हैं।

दोस्तों यह था हमारा आज का लेख जिसमें हमने आपको कटारमल सूर्य मंदिर अल्मोड़ा के बारे में जानकारी दी। आशा करते हैं कि आपको कटारमल सूर्य मंदिर के बारे में जानकर अच्छा लगा होगा। यदि आपको यह लेख पसंद आया है तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर साझा करें।

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