मंगलेश डबराल जीवन परिचय. Manglesh Dabral Biography

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हेल्लो दोस्तों स्वागत है आपका देवभूमि उत्तराखंड के आज के नए लेख में। आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको उत्तराखंड के चर्चित लेखक मंगलेश डबराल के जीवन परिचय के बारें में बात करने वाले है। दोस्तों जैसा की हम सभी लोग जानते है देवभूमि उत्तराखंड में अनेकों महान लोगों ने जन्म लिया जिनके महान कार्य और समर्पण के लिए आज पूरा देश और दुनिया उन्हें याद करती है जिन्होंने उत्तराखंड का नाम हर क्षेत्र में रोशन किया। उन्ही लोगों में से एक है मंगलेश डबराल जिनके बारें में आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बताने वाले है आशा करते है की आपको यह लेख पढ़ कर अच्छा लगेगा इसलिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ना।

मंगलेश डबराल जीवन परिचय. Manglesh Dabral Biography

हिंदी साहित्य के महान कवि मंगलेश डबराल का जन्म सन ( Manglesh Dabral Biography) 16 मई 1948 को उत्तराखंड के टिहरी जिलें में हुआ। इनके गाँव का नाम काफलपानी है। यदि बात इनके पढाई लिखाई के बारें में तो इन्होने देहरादून से अपनी पढाई पूरी की जिसके बाद उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली जैसे शहर में अपना कदम रखा। लिखने की कुशल कला होने के कारण उन्होंने साप्ताहिक समाचार पत्र “प्रतिपक्ष” में काम किया और यही से वह पत्रकारिता के पेशे से जुड़ गए। कुछ समय दिल्ली में काम में काम करने के बाद उन्होंने से इलाहाबाद से प्रकाशित हिंदी दैनिक ‘अमृत प्रभात’ समाचार पत्र में काम करने इलाहाबाद शहर में प्रवेश किया।

सन 1981 में उनका पहला संग्रह पहाड़ पर लालटेन प्रकाशित हुवा। 1983 में उन्होंने जनसत्ता में साहित्य संपादक का ग्रहण किया और अपनी जिम्मेदारियां निभाई। उन्होंने सहारा समय में संपादक कार्य किया जिसके बाद वह नेशनल बुक ट्रस्ट के साथ जुड़ गएँ। मंगलेश डबराल हिंदी भाषा के उन कवियों में से एक है जिनकी दोस्ती न केवल भारतीय भाषाओं के कवियों के साथ ही नहीं थी अपितु उनकी दोस्ती विदेशी भाषाओं के कवियों के साथ भी थी। लेखन कला के साथ साथ उन्हें संगीत और सिनेमा में भी दिलचस्पी थी। बहुभाषी कवि होने के कारण उन्होंने भारतीय भाषाओं की तमाम कविताओं का अनुवाद किया अपनी इस कुशल कला के लिए उन्हें सन 2000 में उन्हें साहित्य अकादमी द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. सन 9 दिसंबर 2020 को 72 वर्ष की उम्र में कोरोना के कारण हिंदी साहित्य के महान कवि मंगलेश डबराल जी का निधन हो गया। लेकिन इस 72 वर्ष की आयु में उन्होंने उत्तराखंड को देश को बहुत बड़ी ख्याति प्रदान की। उनके पाँच काव्य संग्रह ‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘घर का रास्ता’, ‘हम जो देखते हैं’, ‘आवाज भी एक जगह है’ और ‘नये युग में शत्रु’ बहुत प्रसिद्ध हैं जिन्हें जनता के द्वारा ढेर सारा प्यार दिया गया।

मंगलेश डबराल के काव्य संग्रह , Poetry of Manglesh Dabral

  • पहाड़ पर लालटेन
  • घर का रास्ता
  • हम जो देखते हैं
  • आवाज भी एक जगह हैं
  • नये युग में शत्रु

मंगलेश डबराल के गद्य संग्रह, Prose collection of Manglesh Dabral

  • लेखक की रोटी
  • कवि का अकेलापन

मंगलेश डबराल के यात्रावृत्तांत. Travelogue of Manglesh Dabral

  • एक बार आयोवा

मंगलेश डबराल के प्रमुख कवितायें . Major Poems of Manglesh Dabral

  • गुजरात के मृतक का बयान
  • आदिवासी
  • बची हुई जगहें
  • नया बैंक
  • गुलामी
  • जापान: दो तस्वीरें
  • औरत
  • निकोटिन
  • हमारे देवता
  • गुड़हल
  • बच्चों के लिये एक चिठ्ठी
  • पिता का चश्मा
  • माँ के संस्कार
  • मदर डेयरी
  • मोबाइल

मंगलेश डबराल के प्रमुख सम्मान. Major honors of Manglesh Dabral

  • ओमप्रकाश स्मृति सम्मान (1982)
  • श्रीकान्त वर्मा पुरस्कार (1989)
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार (2000)
  • शमशेर सम्मान
  • पहल सम्मान
  • कुमार विकल स्मृति सम्मान
  • हिंदी अकादमी का साहित्यकार सम्मान

दोस्तों यह था हमारा आज के लेख जिसमे हमने आपको मंगलेश डबराल जीवन परिचय के बारें में जानकारी दी। आशा करते है आपको यह लेख पसंद आया होगा आपको यह लेख केसा लगा हमें टिप्पणी के माध्यम से जरूर बताएं एवं उत्तराखंड से सम्बंधित ऐसे ही जानकारीयुक्त लेख पढ़ने के लिए देवभूमि उत्तराखंड को जरूर फॉलो करें।

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